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अद्भुत है अयोध्या का राम विवाह महोत्सव

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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या धाम में हर वर्ष मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को 'विवाह पंचमी' का पर्व मनाया जाता है।    त्रेता युग में इसी तिथि को रघुकुल नंदन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का विवाह माता जानकी के साथ संपन्न हुआ था। सनातन संस्कृति के अनुरूप धर्म नगरी अयोध्या में आज भी यह परंपरा का ठीक उसी तरह निर्वाह किया किया जा रहा है। जैसे त्रेता युग में चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ ने अपने जेष्ठ पुत्र श्री राम का विवाह किया था। ठीक उसी तरह आज भी अयोध्या के मठ मंदिर को सजाया और संवारा जाता है।  फूल-बंगलों की झांकी लगाई जाती है। जगह जगह रामचरितमानस का पाठ, वैवाहिक गाली-गीतों का गान और अयोध्या के मठ मंदिरों की दीवारों पर दीपमालाओं की श्रृंखलाएं अलौकिक छटा को बिखेरतीं हैं। अयोध्या धाम के हर एक दीवारों पर जगमगाते दीपदान, आपको राम विवाह की मनमोहक छटा का स्मरण कराते, जगमगाते दियो की लौ आपको त्रेता युग के राम विवाह के  उस अद्भुत काल की सजीव,सचित्र अनुभूति कराते हैं। जिसकी आप मात्र कल्पना कर सकते हैं।   अयोध्या धाम में इस ...

राम मंदिर निर्माण में कामदगिरि पर्वत की शिला का कितना महत्व है

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राम मंदिर निर्माण में कामदगिरि पर्वत की शिला का कितना महत्व है रघुकुल नंदन के 11 वर्ष 11 माह और 11 दिनों के कठोर वनवास का साक्षी रहा कामदगिरि पर्वत। त्रेता युग में 11 वर्षों तक जिस पर्वत पर जीवन व्यतीत किया है स्वयं प्रभु मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने। आज कलयुग में जब उनके भव्य मंदिर का निर्माण होने जा रहा है तो विश्व हिंदू परिषद  और  राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य निर्माणकार्य कराने वाले जिम्मेदार लोग कामदगिरि पर्वत को कैसे भुला सकते हैं।    लगभग 500 वर्षों के भीषण संघर्ष के उपरांत उन्हीं रघुकुल नंदन की जन्मभूमि पर, उन्हीं के भव्य मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। ऐसे में कामदगिरि पर्वत की शिलाओं को भी मंदिर निर्माण में सहयोग करने का निमंत्रण दिया गया है। इसीलिए कामदगिरि पर्वत की शिला लेकर संतों की एक टोली आज अयोध्या धाम पहुंची है। कहां है कामदगिरि पर्वत?   मध्यप्रदेश और उत्तर-प्रदेश की सीमा पर बसी संतों की नगरी को चित्रकूट कहा जाता है। मंदाकिनी नदी के तट पर बसा चित्रकूट धाम भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में से एक है। कहा जाता ...

भव्य राम मंदिर का प्रतिबिंब होगा अयोध्या का नया रेलवे स्टेशन

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राम मंदिर के भव्य निर्माण के साथ अयोध्या को अब विश्व स्तरीय  रेलवे स्टेशन की सौगात मिलने वाली हैं जिसपर तेज़ी से काम चल रहा है भव्य राम मंदिर  से मिलता जुलता होगा नव्ब्य रेलवे स्टेशन। केंद्र सरकार ने  नए रेलवे स्टेशन का मॉडल  जारी कर दिया है  जिसके अनुसार अयोध्या रेलवे स्टेशन पर अब एक लाख श्रद्धालु व यात्री के ठहरने की उच्च स्तरीय व्यवस्था होगी धर्म नगरी अयोध्या को भगवान श्रीराम की मर्यादा के अनुरूप सजाने-संवारने का काम तेज हो गया है। राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद पूरे विश्व के लोग अयोध्या आने को बेताब हैं, इसको गंभीरता से लेते हुए रेलवे ने भी काम शुरू कर दिया है। अयोध्या में राममंदिर के लुक में ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्टेशन का निर्माण चल रहा है। नए स्टेशन पर एक साथ एक लाख से अधिक श्रद्घालु व यात्री ठहर सकेंगे। यात्रियों की संख्या में इजाफा होने व रेलगाड़ियों के फेरे बढ़ने के अनुमान के बाद अब अयोध्या रेलवे स्टेशन में पांच प्लेटफार्म बनेंगे। इस काम को जून 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  अयोध्या की गरिमा के अनुरूप अयोध्या स्टेशन क...

नकारात्मक कांग्रेस के दिग्विजय सिंह

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दिग्विजय सिंह ने महज एक बयान नहीं दिया है, दरसल इस बयान का क्रोनोलॉजी समझिए और इस बयान को देश के हर एक आदमी को समझने की सख्त जरूरत है। उतना ही जितना ज़िंदगी जीने के लिए आज कल कोरोना वैक्सीन की जरूरत है। ठीक उतना ही जहां एक तरफ पूरा विश्व समुदाय कोरोनावायरस के वैक्सीन को लेकर बेहद चिंतित है और उम्मीदों के राहों पर 24 घन्टे अपनी नजरें टिकाए बैठा है। वहीं भारत ने ना सिर्फ कोरोना से अपने देश के नागरिकों की ज़िंदगी को बचाने का हर संभव उपाय किया, अपितु निरंतर कोरोना से लड़ने के लिये सही और सटीक जानकारी देश के हर एक आदमी तक पहुंचाई और एक तरफ देश के वो सुपर हीरो,जो दिन-रात कोरोना वैक्सीन को बनाने में अपना सब कुछ न्योछावर किए हैं, उन सब का दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए अपमान किया है।   सोचिए देश के वो वैज्ञानिक जो अपना सब कुछ दाव पर लगा कर पिछले 11 महीनों से दिन रात अपनी जिंदगी से अलग शानो-शौक़त से, आराम से, परिवार से, मां बाप सेऔर बच्चों से दूर रहकर हर घड़ी वैक्सीन को बनाने में कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। ऐसे में दिग्विजय सिंह का यह बयान सुनकर उनके हृदय में कैसे-कैसे ख्या...

नकारात्मक कांग्रेस के दिग्विजय सिंह

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दिग्विजय सिंह ने महज एक बयान नहीं दिया है, दरसल इस बयान का क्रोनोलॉजी समझिए और इस बयान को देश के हर एक आदमी को समझने की सख्त जरूरत है। उतना ही जितना ज़िंदगी जीने के लिए आज कल कोरोना वैक्सीन की जरूरत है। ठीक उतना ही जहां एक तरफ पूरा विश्व समुदाय कोरोनावायरस के वैक्सीन को लेकर बेहद चिंतित है और उम्मीदों के राहों पर 24 घन्टे अपनी नजरें टिकाए बैठा है। वहीं भारत ने ना सिर्फ कोरोना से अपने देश के नागरिकों की ज़िंदगी को बचाने का हर संभव उपाय किया, अपितु निरंतर कोरोना से लड़ने के लिये सही और सटीक जानकारी देश के हर एक आदमी तक पहुंचाई और एक तरफ देश के वो सुपर हीरो,जो दिन-रात कोरोना वैक्सीन को बनाने में अपना सब कुछ न्योछावर किए हैं, उन सब का दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए अपमान किया है।   सोचिए देश के वो वैज्ञानिक जो अपना सब कुछ दाव पर लगा कर पिछले 11 महीनों से दिन रात अपनी जिंदगी से अलग शानो-शौक़त से, आराम से, परिवार से, मां बाप सेऔर बच्चों से दूर रहकर हर घड़ी वैक्सीन को बनाने में कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। ऐसे में दिग्विजय सिंह का यह बयान सुनकर उनके हृदय में कैसे-कैसे ख्या...

यादों के शंकर, गौरी शंकर

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मुझे याद है कि जब मैं बहुत छोटा था और गांव में रहता था। उस दौरान श्रावण मास के सोमवार के दिन या अन्य किसी शंकर भगवान के पारंपरिक त्योहारों पर हम लोग गौरी शंकर मंदिर जाया करते थे। गौरी शंकर मंदिर जाने का दो फायदा होता था, एक फायदा तो यह था कि हम गौरी शंकर जी को जल चढ़ाएंगे और उससे वह प्रसन्न हो जाएंगे और दूसरा फायदा बड़ा फायदा पेट से जुड़ा रहता था। दूसरा फायदा हमको यह लगता था कि जब हम गौरीशंकर जाएंगे तो वहां पर जलेबी खाएंगे और गुड़ वाले ख़ुरमे खाएंगे। मतलब गौरीशंकर जाने से हमेशा फायदा रहता था। गौरी शंकर मंदिर जाने के 1 दिन पहले यानी रविवार की शाम को ही हमारी आंटी, भाभी, बड़ी-बहन  सब मिलकर बेल के पत्ते और फूल, पत्तियों को इकट्ठा कर लेती थीं। अब मामला यह होता था कि सुबह उठाएगा कौन?  उस समय मोबाइल का प्रचलन नहीं था। लेकिन ग्रामीण वासी सुबह जल्दी नींद से जाग जाते हैं लिहाजा घर के बड़ों को यह जिम्मेदारी दी जाती है कि वह सुबह उठते ही हमको उठा देंगे, यहां पर मामला फिट बैठ जाता है क्योंकि आंटी और भाभी सुबह 4:00 बजे ही उठ जाया करती थीं। अब आती है हम बच्चों की बारी, हम लोगों को शाम से ही ...

सहानुभूति या राजनीति

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हाथरस, बुलंदशहर, बलरामपुर की घटना हो या देश के किसी भी कोने में हो रहे बेटियों के साथ जघन्य अपराध का किसी भी घटना से कम आकलन करना मानव जाति के लिए नीचता का कृत्य होगा। देश की मीडिया, शासन-प्रशासन और गिद्ध जैसी निगाहें गड़ाए बैठे विपक्ष के नेताओं से भी यह कहना चाह रहा हूं,कि किसी भी घटना को दलित या किसी भी समाज से संबोधित करना अपने आप में एक जघन्य अपराध है। बेटी किसी की भी हो बेटी- बेटी होती है, उसको चुनावी या राजनीतिक फायदे के लिए जातिगत जामा पहनाना अपने आप में एक घोर पाप हैं। जिसका प्रायश्चित इस धरातल पर नहीं है। भारत देश युवाओं का देश है। सबसे पहले उन युवाओं को सोचना होगा कि जो राजनीतिक पार्टियां चाहे वह सत्ता में है या विपक्ष में है, किसी भी घटना को किसी समाज से जोड़कर उद्बोधन करती हैं।उनके साथ आने वाले चुनाव में, जब आपकी मुलाकात आपके चौखट पर सत्ता की कुर्सी की भीख मांगने के लिए लालायित उन नेताओं से हो, तो उनसे जरूर पूछें कि आप इंसानियत के लिए, देश सेवा के लिए वोट मांग रहे हैं या अपने राजनीतिक फायदे के लिए।